इसके इतिहास, महत्व और दिवस का थीम का एक नज़रिया
इतिहास:
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का पहला उत्सव 28 फरवरी, 1986 को मनाया गया था, जब विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार के लिए राष्ट्रीय परिषद ने भारत सरकार को यह विचार प्रस्तावित किया था। पहले राष्ट्रीय विज्ञान दिवस का उद्घाटन भारत के तब के प्रधानमंत्री राजीव गांधी द्वारा नई दिल्ली में स्थित राष्ट्रीय विज्ञान, प्रौद्योगिकी, और विकास अध्ययन संस्थान (NISTADS) में किया गया था। तब से इस दिन को विभिन्न थीम के साथ हर साल मनाया जाता है ताकि वैज्ञानिक खोज और उनकी उन्नतियों के बारे में जागरूकता फैलाई जा सके।
महत्व:
यह दिवस भारतीय वैज्ञानिकों के योगदान को मान्यता देने और लोगों में वैज्ञानिक भावना और नवाचार को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है। इस घटना का उद्देश्य युवा मस्तिष्कों को विज्ञान और प्रौद्योगिकी में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करना होता है, और देश में वैज्ञानिक अनुसंधान और विकास को बढ़ावा देना भी होता है।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2023
का थीम भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा अभी तक घोषित नहीं किया गया है। हालांकि, पिछले सालों के थीम निम्नलिखित थे:
2022: संचार के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी
2021: भविष्य में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और उनके शिक्षा, कौशल और काम पर प्रभाव
2020: विज्ञान में महिलाओं की भूमिका
2019: विज्ञान जनता के लिए और जनता विज्ञान के लिए
2018: एक संगठित और समर्थ समाज के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2023 के लिए थीम की उम्मीद है कि यह भारत और दुनिया को आज जो वैज्ञानिक मुद्दों और चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, उन पर ध्यान केंद्रित करेगी, और यह बताएगी कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी उन्हें कैसे उन्हें पार करने में मदद कर सकते हैं।
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